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प्रीति जिंटा सरोगेसी की मदद से बनी 46 की उम्र में मां, जानिए क्या होती है सरोगेसी की प्रक्रिया?

हर औरत के लिए मां बनना काफी खास होता है। जबकि ज्यादातर औरते खुद ही गर्भवती (Pregnancy) होकर बच्चे पैदा करना पसंद करती हैं, वही इन दिनों सरोगेसी का चलन भी काफी बढ़ता जा रहा है। इस तकनीक ने उन महिलाओं के लिए मां बनना मुमकिन कर दिया है जो स्वास्थ्य और निजी कारणों के चलते खुद अपने कोख में बच्चा नहीं रख सकतीं।

बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा सरोगेसी से जुड़वा बच्चों की मां बन चुकी हैं. सरोगेसी मां बनने की लिस्ट में प्रीती अकेली नहीं हैं. बॉलीवुड के कई कपल इससे भी सरोगेसी से पेरेंट्स बन चुके हैं उनसे पहले एकता कपूर, तुषार कपूर, लिसा रे और सनी लियोन जैसे कलाकारों ने भी सरोगेट मां का इस्तेमाल करते हुए पैरेंट बनने की खुशी हासिल की है।

प्रीति ने अपने पति के संग एक प्यारी सी तस्वीर शेयर की है. जिसके साथ उन्होंने लिखा है. ‘सबको मेरा नमस्कार, मैं आज आप सभी के साथ एक बड़ी खबर शेयर करना चाहती हूं. जीन और मैं बहुत खुश हैं और हमारे दिल इस समय कृतज्ञता और प्यार से भर गए हैं. हम अपने परिवार में अपने जुड़वां बच्चों जय जिंटा गुडएनफ और जिया जिंटा गुडएनफ का स्वागत करते हैं.’

बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा और उनके पति जीन गुडइनफ ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक गुड न्यूज शेयर की है. दरअसल, इस कपल ने सरोगेसी के जरिए जुड़वां बच्चों को जन्म दिया है. इस खुशखबरी को खुद प्रीति ने ट्विटर पर शेयर किया है. उन्होंने इस ऐलान के साथ अपने दोनों बच्चों के नाम भी सबको बता दिए हैं.

प्रीति ने जो पोस्ट लिखा है उसके शब्दों से उनके दिल की खुशी साफ जाहिर हो रही है. उन्होंने अपने बच्चों के नाम जय और जिया रखें हैं. जिससे ये जाहिर हो रहा है कि जय बेटा और जिया बेटी है. हालांकि प्रीति ने अपनी पोस्ट में बेटा-बेटी को लेकर कोई बात नहीं लिखी है.

सरोगेसी का सीधा सा मतलब है- दूसरे के बच्चे को अपनी कोख में पालना। बहुत सी ऐसी महिलाएं होती हैं जो दूसरों के लिए सरोगेट मदर (surrogate mother) बनती हैं और इसके लिए उन्हें काफी पैसे मिलते हैं। साफ शब्दों में कहे तो ‘किसी महिला की कोख को किराए पर लेना ही सरोगेसी कहलाती है’। इसमें सबसे खास बात ये है कि एक महिला को अपने कोख में बच्चा पालने के लिए कोई शारीरिक संबंध बनाने की जरूरत नहीं होती।

 

दो तरह की होती है सरोगेसी-

ट्रेडिशनल सरोगेट (Traditional surrogate)

इसमें सरोगेट मदर ही आर्टिफिशियल तरीके से पिता के स्पर्म (sperm) के साथ गर्भाधान करती है। इसमें सरोगेट महिला ही बच्चे की जैविक मां (biological mother) होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसका ही एग पिता के स्पर्म के साथ मिलाया जाता है। इसमें डोनर स्पर्म (donor sperm) भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, बच्चे को जन्म देने के बाद सरोगेट उसे कपल के पास छोड़कर चली जाती है।

गेस्टेशनल सरोगेट (Gestational surrogate)

“इन विट्रो फर्टिलाइजेशन” (IVF) नामक एक तकनीक से ये संभव हो पाता है। ये पूरी प्रक्रिया लैब में होती है। इसमें महिला के शरीर से एग निकाल कर सुई के जरिए उसमें स्पर्म डाला जाता है और जब भ्रूण (embryo) तैयार हो जाता है तो इसे एक मेडिकल ट्यूब के जरिये सरोगेट गर्भाशय (Uterus) में ​डाल दिया जाता है। इसमें सरोगेट का बच्चे से कोई संबंध नहीं होता, वह बस उसे 9 महीने अपनी कोख में पालती है।

बता दें कि सरोगेट मदर और दंपत्ति के बीच एक खास एंग्रीमेंट भी किया जाता है। सरोगेट मदर को प्रेग्नेंसी के दौरान अपना ख्याल रखने और मेडिकल जरूरतों के लिए तो पैसे दिए जाते ही हैं, साथ ही, इसके अलावा भी महिला सरोगेसी के लिए अलग से एक अमाउंट चार्ज करती है। इसमें कम से कम 10-15 लाख रुपए का खर्चा आता है और विदेशों में तो सरोगेसी की प्रक्रिया और भी महंगी होती है।

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