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पत्नी की हुई कैं’सर से मौ’त, यादों में जिंदा रखने के लिए पति ने बनवाई बीवी की संगमरमर की मूर्ति

कहते हैं कि शाहजहां अपनी पत्नी मुमताज को इतनी मोहब्बत करते थे कि मुमताज के म’रने के बाद शाहजहां ने उनकी याद में ताजमहल बनवा दिया.मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में खूबसूरत ताजमहल बनवाकर प्यार की मिसाल कायम की थी. चंडीगढ़ में रहने वाले एक शख्श विजय कुमार ने भी मोहब्बत के मामले में शाहजहां जैसा काम किया है.

विजय कुमार की पत्नी का इसी साल मार्च महीने में नि’धन हो गया था. पत्नी की मौ’त के बाद विजय कुमार ने उनकी संगमरमर की आदमकद मूर्ति राजस्थान से बनवाकर उसे अपने घर में जगह दी है.अपनी दिवं’गत पत्नी की याद में 1,100 किलो वजन की संगमरमर की मूर्ति बनवाई है. विजय कुमार ने बताया की उनकी पत्नी को ब्लड कैं’सर था. इसी साल मार्च में अचानक इससे उनकी मौ’त हो गई. उन्होंने 48 साल की अपनी पत्नी के साथ रहकर पूरी दुनिया घूमा और अब उनकी अचानक मौ’त से वो बहुत दुखी हैं.

विजय कुमार ने कहा कि पहले लोगों ने उनका मजाक भी बनवाया और मूर्ति बनाने पर सवाल भी खड़े किए लेकिन इससे उन्हें कुछ फर्क नहीं पड़ता. इस काम में विजय के बच्चों ने भी मदद की.

70 वर्षीय कारोबारी विजय कुमार ने अपनी पत्नी वीणा की याद में 1100 किलो की संगमरमर की मूर्ति बनवाई है, जिसका आकार भी उनकी स्व’र्ग’वासी पत्नी के कद जितना है. यही नहीं पत्नी को हुए कैं’सर का पता चलने पर विजय कुमार ने उनके लिए पांच किताबें भी लिखी हैं. लेकिन विजय कुमार के लिए उनकी पत्नी म’री नहीं हैं बल्कि संगमरमर की बनवाई मूर्ति में वो उन्हें देखते हैं. विजय कुमार सुबह शाम इस मूर्ति के सामने बैठ कर अपनी पत्नी को अपने साथ महसूस करते हैं.

पति और पत्नी का रिश्ता जितना नाजुक होता है उतना ही इसको मजबूत भी बनाया जा सकता है. चंडीगढ़ में रहने वाले विजय कुमार और उनकी पत्नी वीणा की मोहब्बत भी किसी शाहजहां और मुमताज से कम नहीं हैं. 70 वर्षीय विजय कुमार अपनी पत्नी वीणा के देहांत से सदमे से उभर नहीं पाए हैं. अभी तक जिंदगी का हर पल अपनी पत्नी के साथ बिताने वाले विजय कुमार ने पत्नी के देहां’त के बाद पत्नी के बुत को ही अपना साथी मान लिया है.

भारत में गर्म तापमान की वजह से मोम की मूर्ति को ज्यादा दिन तक संरक्षित रख पाने में मुश्किल होती इसलिए उन्होंने मोम की जगह संगमरमर की मूर्ति बनवाई.मोम की मूर्ति बनवाने में करीब 4400 पाउंड का खर्चा आता. कीमत को लेकर विजय कहते हैं कि उन्होंने जिस भावना से ये मूर्ति तैयार करवाई है, उसकी कोई भी कीमत नहीं है. इसलिए वे इस मूर्ति पर खर्च किए गए पैसे का खुलासा नहीं करना चाहते.

 

विजय कुमार का कहना है कि वह सिर्फ ये मिसाल कायम करना चाहते हैं कि पति-पत्नी के बीच के अटूट रिश्ते में भी बेहद प्यार हो सकता है. पत्नी या पति किसी के जाने के बाद भी उनकी यादों को जिंदा रख सकते हैं.

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