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पति के नि’धन के बाद 3 बच्चों के लिए कुली का काम कर रही हैं संध्या, कहानी जानकर आपकी भी आंखें हो जाएंगी नम

हर इंसान का कोई ना कोई सपना होता है परंतु जब सपना टूट जाता है तो उस परिस्थिति में व्यक्ति पूरी तरह से हिम्मत खो देता है परंतु ऐसा नहीं है कि सभी लोग कठिन समय में अपने आपको संभाल नहीं पाते हैं। भले ही सपने टूट गए हों, लेकिन अभी भी इस दुनिया में बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके हौसले हमेशा जिंदा रहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इंसान के जीवन में कब बुरा वक्त आ जाए उसके बारे में बता पाना बहुत ही मुश्किल है। आज हम आपको एक ऐसी महिला के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं जिसकी कहानी आपको भावुक कर देगी। इनकी कहानी जानकर आपकी आंखों से आंसू निकलने लगेंगे।

अगर आप नारी शक्ति का सबसे ताजा उदाहरण देखना चाहते हैं तो आपको मध्य प्रदेश के कटनी रेलने स्टेशन आना होगा. हम में से ज्यादातर लोग पुरुषों को ही कुली के रूप में कार्य करते देख बड़े हुए हैं. हालांकि, मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में कटनी रेलवे स्टेशन पर एक महिला भी ये काम कर रही है. आपको बता दें कि 31 वर्षीय संध्या मारावी अपने तीन मासूम बच्चों को पालने के लिए मजबूरी में कुली का काम कर रही हैं, बताया जा रहा है कि संध्या मारावी देश की पहली महिला कुली हैं. अगर आप संध्या को भारी भरकम सामान उठाए देखें तो हैरान कतई मत होइएगा.

पति पेशे से मज़दूर थे, लेकिन दाल-रोटी चल रही थी. मगर, 2016 में पति के नि’धन के बाद सबकुछ बदल गया. एकदम से संध्या के कंधों पर घर की पूरी जिम्मेदारी आ गई. उनके सामने घर का खर्च चलाने की बड़ी चुनौती थी. इस मुश्किल समय का संध्या ने मजबूती से सामना किया और तय किया कि वो कुली बनेंगी. आगे समाज की चिंता किए बिना उन्होंने अपने कदम बढ़ाए और 2017 में अपना काम शुरू कर दिया.।  जिसकी वजह से यह कुली का काम करके यात्रियों का बोझ ढो रही हैं।

 

रोते हुए बतायी अपनी दास्ताँ

संध्या ने रोते हुए अपनी दास्ताँ बताते हुए कहा, मैं नौकरी की तलाश में थी. किसी ने मुझे बताया कि कटनी रेलवे स्टेशन पर कुली की जरूरत है। मैंने तुरंत अप्लाई कर दिया “भले ही मेरे सपने टूटे हैं, लेकिन हौसले अभी जिंदा है। जिंदगी ने मुझसे मेरा हमसफर छीन लिया, लेकिन अब बच्चों को पढ़ा लिखाकर फौज में अफसर बनाना मेरा सपना है। इसके लिए मैं किसी के आगे हाथ नहीं फैलाऊंगी। कुली नंबर 36 हूं और इज्जत का खाती हूं।” यह कहना है 31 वर्षीय महिला कुली संध्या का।

बीमारी की वजह से पति का हो गया निधन

आपको बता दें कि संध्या के पति काफी लंबे समय से बी’मार चल रहे थे। संध्या अपने पति के साथ कटनी में रहती हैं और उनके तीन बच्चे हैं। बीमारी की वजह से 22 अक्टूबर 2016 को उनके पति का नि’ध’न हो गया। बीमारी के बावजूद भी संध्या के पति मजदूरी करके घर चलाते थे लेकिन उनके जाने के बाद संध्या के ऊपर सास और अपने तीन बच्चों की जिम्मेदारी आ गई। ऐसी स्थिति में संध्या को जो नौकरी मिली, वही नौकरी इन्होंने कर ली।

 

तीन मासूमों के लिए संध्या कर रही हैं ये काम

संध्या का ऐसा कहना है कि वह नौकरी की तलाश में इधर-उधर भटक रही थीं, किसी ने मुझे बताया कि कटनी रेलवे स्टेशन पर कुली की आवश्यकता है तो मैंने तुरंत ही इसके लिए आवेदन कर दिया। संध्या का ऐसा कहना है कि वह कटनी जंक्शन पर कुली का काम कर रही हैं। “मैं 45 पुरुष कुलियों के साथ काम करती हूं। पिछले वर्ष ही मुझे बिल्ला नंबर 36 मिला है।”

आपको बता दें कि संध्या के दो छोटे बेटे साहिल और हर्षित हैं और एक बेटी पायल है। पति के जाने के बाद संध्या ने अपने घर को संभाला। संध्या अपनी जॉब के लिए रोजाना 90 किलोमीटर (45 किमी जाना-आना) कर कटनी रेलवे स्टेशन पर आती हैं।अपने तीन बच्चों को पालने के लिए संध्या को यह काम करना पड़ रहा है। संध्या का कहना है कि यहां 45 पुरुष कुलियों के साथ वह काम करती हैं। पिछले साल ही उनको बिल्ला नंबर 36 मिला है। संध्या जबलपुर में रहती हैं और अपनी नौकरी के लिए वह रोजाना 90 किलोमीटर की यात्रा करती हैं।

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