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कभी गलती से भी फ़ोन को पास में लेकर मत सोना वरना हो जायेगा ऐसा

मोबाइल का प्रयोग आजकल की जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा हो गया है। लेकिन क्या आपको पता है मोबाइल तकनीकी रूप से जितना फायदेमंद है यह स्वास्थ्य के लिए उससे कहीं ज्यादा नुकसानदेह है। मोबाइल फोन से निकलने वाली इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक तरंगे हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती हैं।

कई लोगों की आदत होती है कि वह फोन सिर के पास ही रख कर सोते हैं। यह आदत सेहत के लिए खतरनाक है। इसका कारण है रैडिएशन। फोन ही नहीं, वाई-फाई राउटर, माइक्रोवेव ओवन आदि उपकरण भी रैडिएशन के जरिए हमें नुकसान पहुंचाते हैं। फोन को अगर ‘प्‍लेन मोड’ में रखा जाए तो रैडिएशन के खतरे से बचा जा सकता है। यह जानकारी हाल ही में टीवी शो केबीसी में आए एक प्रतिभागी ने अमिताभ बच्‍चन से बातचीत में भी सार्वजनिक की। वह प्रतिभागी इसी क्षेत्र के एक्‍सपर्ट हैं। दरअसल मुंबई से आए रेडियो इंजीनियर विजय सिंह ने केबीसी में बिग बी से बात करते हुए बतलाया कि रात में सोते वक्त मोबाइल फोन को साथ रखना नुकसान देह हो सकता है।

हर बार स्मार्टफोन के इस्तेमाल से रेडियो फ्रिक्‍वेंसी निकलती हैं, जो आपके मेटाबोल्जिम और खान-पान पर बुरा असर डाल सकती है. साथ ही कई शोध में पता चला है कि इसे कई खतरनाक बीमारियां भी हो सकती हैं. कई बार मोबाइल के ज्‍यादा इस्‍तेमाल से थकान, कमजोरी और चक्‍कर जैसी शिकायत हो सकती है और हम इसका कारण नहीं समझ पाते.

इन किरणों के कारण याददाश्त और सुनने की शक्ति प्रभावित हो सकती है। इससे निकलने वाले रेडियेशन के कारण कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के मामले दिखे हैं। इसके अलावामोबाइल फोन और उसके टावरों से होने वाले रेडियेशन से शरीरिक कमजोरी और ब्रेन ट्यूमर हो सकता है।

 

यहां आपको यह भी बता दें कि मोबाइल रैडिएशन को लेकर हुए कई अध्ययनों में भी कहा गया है कि इससे तमाम दिक्कतें हो सकती हैं, जिनमें प्रमुख हैं- सिरदर्द, सिर में झनझनाहट, लगातार थकान महसूस करना, चक्कर आना, डिप्रेशन, नींद न आना, आंखों में ड्राइनेस, काम में ध्यान न लगना, कानों का बजना, सुनने में कमी, याददाश्त में कमी, पाचन में गड़बड़ी, अनियमित धड़कन, जोड़ों में दर्द आदि।

रात के समय मोबाइल फोन से दूर रहें क्योंकि इसके ज़्यादा इतेमाल से शरीर में कोर्टिजोन नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ता है और आप नींद के दौरान भी तनाव में रहते हैं. मोबाइल फोन को हमेशा शरीर से चिपका कर रखने से आपके डीएनए का स्ट्रक्चर भी बिगड़ सकता है. कई शोधों में यह बात सामने आई है कि मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडिएशन से डीएनए के स्ट्रक्चर पर असर होता है.

भारत में मोबाइल फोन से निकलने वाले रेडियेशन के खतरे को कम करने के लिए भारतीय दूरसंचार मंत्रालय ने 2012 में नये नियम बनाये। सेलफोन की वजह से बढ़ रहे कैंसर के मामलों के कारण सरकार ने यह फैसला लिया। नये कानून के तहत प्रत्येक मोबाइल फोन का स्पेसिफिक एब्जार्प्शन यानी एसआर रेट का स्तर 1.6 वॉट प्रति किग्रा होगा।

इससे पहले ये मानक 2 वॉट प्रति किग्रा था। इसका 1 ग्रा रेडियेशन भी शरीर के लिए नुकसानदेह है। मोबाइल फोन को कान में लगाकर यदि कोई व्यक्ति लगातार बीस मिनट तक बात करता है तो उसके दिमाग का तापमान दो डिग्री सेल्शियस तक बढ़ने की आशंका रहती है। इसके कारण ब्रेन ट्यूमर हो सकता है। इसलिए मोबाइल कभी भी तकिये के पास या बेड पर या नजदीक नही रखना चाहिए ताकि इन हानिकारक रेडिएशन से बचा जा सके।

अगर रैडिएशन खिड़की, दीवार या छत के से आ रहा है तो हम उसके सोर्स को पता कर उसे ढंंक देते हैं। घर में रखे माइक्रोओवन, मोबाइल फोन, वाई-फाई कनेक्शन से भी रेडिएशन का खतरा बना रहता है। कम से कम इनका इस्तेमाल करते हैं। वाई-फाई के राउटर को सोने, बैठने या पढ़ने की जगह से कम से कम 5 सेंटीमीटर की दूरी पर ही लगाएं। रात को सोते वक्त मोबाइल फोन को एयरोप्लेन मोड में रखकर ही सोएं।

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