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बिहार के अनपढ़ लड़के में करा कमाल, घर पर ही बना डाला हेलीकॉप्टर

भारत में टैलेंट की कोई कमी नहीं है कुछ समय पहले नरेंद्र मोदी ने भारत को आत्मनिर्भर बनने की आग्रह किया था। जहां लोगो ने खुद का व्यापार व्यवसाय करना शुरू कर दिया। लोग भारत बंद के दौरान घर पर रहते ही काफी चीजों का निजात करने लगे है। आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताते हैं जिसने अपने घर पर ही अपनी मेहनत और लगन से हेलीकॉप्टर बना दिया।

गांव हो या शहर युवाओं में टैलेंट की कोई कमी नहीं है।हम सभी प्रतिदिन किसी न किसी नए आविष्कार के बारे में सुनते रहते हैं, देखते भी हैं। यह जरूरी नहीं कि कुछ नया करने के लिए उस व्यक्ति का पढ़ा लिखा होना ही आवश्यक है, अनपढ़ व्यक्तियों में भी टैलेंट की कोई कमी नहीं है। हाल ही में एक अनपढ़ लड़के की प्रतिभा सामने आई है, उसने एक हेलीकॉप्टर बनाया (Made Helicopter) है, जो बिना किसी ईंधन के उड़ती भी है।

हम बात कर रहे हैंअमरजीत माझी जो बिहार राज्य के गोपालगंज के बेलसंड गांव का रहने वाला है.यह लड़का इन दिनों अपना सपना पूरा करने में लगा है हेलीकॉप्टर बनाने में काफी व्यस्त है उसका सपना यही है कि वह हेलीकॉप्टर बनाए और वह उड़ान भरे.अमरजीत ने अपना लक्ष्य साध लिया और हेलीकॉप्टर बनाने में जुट गए. अमरजीत पहले मकैनिक का काम करते थे इस कारण से उनको जानकारी है.आपको यह जानकर काफी हैरानी होगी अमरजीत को विदेश से भी हेलीकॉप्टर बनाने के लिए ऑफर मिले थे लेकिन उन्होंने इस को अस्वीकार कर दिया और अपने देश का नाम रोशन करने के लिए वापस आ गए. वह अपने हेलीकॉप्टर के कार्य को करने में पिछले 1 वर्ष से वह हेलीकॉप्टर बनाने में जुट गए हैं.

अमरजीत एक मैकेनिक का काम करते हैं जिसके कारण उन्हें गाड़ियों की अच्छी खासी समझ है। लेकिन आपके लिए यह काफी आश्चर्यजनक बात होगी कि अमरजीत के हेलीकॉप्टर बनाने के बाद उसे विदेशों से भी करोड़ों रुपए के ऊपर आ रहे हैंएम लेकिन उसने हर ऑफर को अस्वीकार कर दिया है। देश का नाम रोशन करने के लिए देश में रहकर ही अपना कार्य आगे बढ़ाने का विचार कर रहे हैं।

अमरजीत के पिता का नाम रामबली माँझी (Rambali Manjhi) हैं। वे अपने पिता के पांचवे बेटे हैं। गरीबी अवस्था में बचपन व्यतीत होने के कारण अमरजीत को उचित शिक्षा नहीं मिल पाई, वे सिर्फ पहली कक्षा तक ही पढ़ाई किए। घर में आर्थिक मदद करने के लिए वे आस-पास के गांव में मजदूर का काम किया करते थे, कुछ समय बाद असम में तेल रिफाइनरी में काम सीखने के बाद नौकरी भी किए। फिर वे विदेश गए और वहीं पर हेलीकॉप्टर बनाने की जानकारी सीखें और अपने घर आकर हेलीकॉप्टर बनाने में जुट गए।

अमरजीत के पिता को जब पता चला इस हेलीकॉप्टर उड़ाने के बारे में तब उन्होंने अपने बेटे से इसकी पूरी जानकारी हासिल की. इसी विषय को बताते हुए उन्होंने अपने पिता को एक छोटा हेलीकॉप्टर बनाकर दिखाया और हेलीकाप्टर को उड़ा कर दिखाया.हेलीकॉप्टर के सिलसिले में अमरजीत दुबई भी चले गए थे. कई दिन वहां पर काम किया था. लेकिन वहां भी इनका मन नहीं लगा.वह दुबई भी गए और दुबई जाकर उन्होंने वहां पर कई सारी जानकारी हासिल की.वापस आ गए वहां से आने के बाद अमरजीत ने मन में ठान लिया कि वह हेलीकॉप्टर उड़ा कर ही रहेंगे.

अमरजीत ने दुबई से वापस आने के बाद बिहार में अपने घर पर रहकर ही हेलीकॉप्टर बनाने के लिए काम शुरू कर दिया। लेकिन पैसों की कमी कारण वह काफी परेशान हुए। इसके लिएउसके पिता ने अपनी जमीन भी भेज दें ताकि अमरजीत की हेलीकॉप्टर बनाने में सहायता कर सकें। फिलहाल इसका का लगभग 80% काम पूरा हो चुका है। इंजन सेट, पंखा सहित हेलीकॉप्टर का पूरा नक्शा तैयार हो चुका है और उम्मीद है कि जल्दी ही यह उड़ान भरने के लिए तैयार रहेगा।

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