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70 साल की महिला ने दिया बेटे को जन्म, शादी के 45 साल बाद भरी सूनी गोद

कहते हैं एक महिला के लिए मां बनना एक अलग ही अनुभव होता है। दुनिया की सारी खुशियां एक तरफ लेकिन मां बनने की खुशी एक तरफ होती है। यह एक ऐसी भावना है, जिसे शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है। मगर कई महिलाओं को इस खुशी से अछूता रहना पड़ता है। इसकी वजह कई सारी हो सकती हैं। कई सारी मेडिकेशन के बाद भी कभी-कभी मां बन पाना हर महिला के लिए संभव नहीं हो पाता है।

एक महिला के लिए मां बनना अपने आप में बेहद खास अनुभव होता है। मगर 70 साल की उम्र में अगर कोई महिला मां बने, तो इसे आप क्या कहेंगे? मगर वो कहते हैं न कि ऊपर वाले के घर देर है, अंधेर नहीं। बस ऐसा ही कुछ गुजरात में देखने को मिला। गुजरात के कच्छ से एक खास खबर ने सबको हैरान कर दिया है। लोग इस खबर को सुनने के बाद, इसे चमत्कार का नाम दे रहे हैं। आप भी खबर सुनेंगे तो शायद यही कहेंगे।

गुजरात के कच्छ में ऐसा ही हुआ है। 70 वर्षीय जीवूबेन राबरी ने शादी के 45 साल बाद एक बेटे को जन्म दिया है। जीवूबेन का तो दावा है कि वह किसी बच्चे को जन्म देने वाली दुनिया की सबसे उम्रदराज महिला हैं। जिस उम्र में लोग अपने नाती पोतों के साथ खेलते हैं , वहीं इस उम्र में एक औरत ने बच्चे काे जन्म दिया है।

महिला का कहना है कि अब तक उनका जीवन अधूरा था, मां बनने के बाद पूरा हो गया है। 45 सालों के बाद इस घर में किलकारी गूंजने के बाद पूरे गांव में खुशियों मनाई जा रह है। वही कुछ लोग इस खबर के बाद हैरान भी हैं। बुजुर्ग जोड़ा टेस्ट ट्यूब के जरिए माता- पिता बने हैं। जन्म के बाद मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

इस सिलसिले में डॉक्टर का कहना है कि दंपति की उम्र काफी ज्यादा है, ऐसे में बच्चा होने की उम्मीद काफी कम थी। उन दोनों ने डॉक्टरों ने कहा कि आप अपनी तरफ से कोशिश करें, फिर हमारी किस्मत। उनकी किस्मत ने उनका साथ दे दिया और आज वह एक बच्चे के माता- पिता बन गए हैं।

70 साल की उम्र में बच्चे के जन्म के बाद से जीवूबेन और उनके पति मालधारी (75) चर्चा का विषय बने हुए हैं। दोनों ने हाल ही में एक प्रेसवार्ता के दौरान गर्व के साथ अपना बेटा पत्रकारों को दिखाया। दंपती को यह बच्चा आईवीएफ तकनीक से हुआ है। दोनों कच्छ के छोटे से गांव मोरा के रहने वाले हैं। बच्चे के जन्म के बाद से परिवार और रिश्तेदारों में खुशी की लहर है। मां और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।

गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. नरेश भानुशाली ने बताया, ‘हमने पहले उनके मेन्स्ट्रुअल साइकिल को रेग्युलर किया ओरल मेडिसिन देकर। उसके बाद हमने उनके यूट्रस को खोला, जो उम्र के साथ सिकुड़ गया था। फिर हमने उनके एग्स को फर्टिलाइज किया और ब्लास्टोसिस्ट क्रिएट की और उसे यूट्रस में ट्रांसफर किया।’ इसके बाद डॉक्टर्स ने दो हफ्ते बाद सोनोग्राफी की और वे फीटस को देख काफी हैरान थे, उन्होंने उसे मोनिटर करना जारी रखा। कुछ समय बाद उन्हें हार्टबीट भी सुनाई दी और कोई डिफॉर्मिटी न दिखने के बाद उन्होंने प्रेग्नेंसी को जारी रखा। हालांकि मां को पहले से कोई गंभीर बीमारी नहीं थी, लेकिन उम्र के साथ ब्लड प्रेशर को देखते हुए डॉक्टर्स ने आठ महीने बाद सी-सेक्शन किया।

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